निर्गमन 34,5-9 – तू हमारे मध्‍य में होकर चल

प्रभु मेघ में उतरा। वह वहाँ मूसा के साथ खड़ा हुआ और उसने अपना “प्रभु” नाम घोषित किया।

प्रभु उनके सामने से निकला और उसने घोषित किया, ‘प्रभु! प्रभु! वह दयालु, और अनुग्रह करने वाला, विलम्‍ब-क्रोधी, अत्‍यन्‍त करुणामय, सत्‍य परमेश्‍वर है।

वह हजारों पीढ़ियों पर करुणा करने वाला; अधर्म, अपराध और पाप को क्षमा करनेवाला है। किन्‍तु वह दोषी को किसी भी प्रकार निर्दोष सिद्ध न करेगा। वह पूर्वजों के अधर्म का दण्‍ड तीसरी और चौथी पीढ़ी तक उनकी संतान तथा आनेवाली संतान को देता रहता है।’

मूसा ने भूमि की ओर अपना सिर अविलम्‍ब झुकाया, और प्रभु की वन्‍दना की।

मूसा ने कहा, ‘हे स्‍वामी, यदि मैंने तेरी कृपा-दृष्‍टि प्राप्‍त की है, तो मैं विनती करता हूँ, स्‍वामी, यद्यपि वे ऐंठी-गरदन के लोग हैं, तो भी तू हमारे मध्‍य में होकर चल। हमारे अधर्म को, हमारे पाप को क्षमा कर और हमें अपनी निज सम्‍पत्ति बना।’


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