प्रभु की स्तुति करो

जोआचिम निएंडर के लेख से (1680) एआई द्वारा रचित एक गीत

प्रभु की स्तुति करो, सर्वशक्तिमान
सृष्टि के राजा, महिमा महान
हे मेरे मन, तू उसकी स्तुति कर
वही है तेरा उद्धार और जीवन आधार

आओ सब लोग जो सुनते हो पुकार
उसके भवन में आओ पास

आनंद से मिलकर करें आराधना
प्रभु की महिमा गाएँ सदा
उसकी अनुग्रह से सब कुछ मिला
जीवन में हर आशीष खिला

प्रभु की स्तुति करो, जो राज्य करे महान
अद्भुत रीति से सब पर प्रधान
अपने पंखों के नीचे वह ढाँपता
कोमलता से जीवन संभालता

क्या तुमने नहीं देखा हर एक आवश्यकता
उसकी कृपा से हुई पूरी सदा

प्रभु की स्तुति करो, जो कार्य संवारे
जो रक्षा करे, जो साथ तुम्हारे
उसकी भलाई और दया सदा
दिन-प्रतिदिन संग रहती सदा

फिर से सोचो उसकी सामर्थ्य को
क्या कर सकता है वह प्रेम में हो

प्रभु की स्तुति करो, सब कुछ जो मुझमें है
उसकी आराधना में झुक जाए
हर जीवन, हर श्वास जो पाए
आओ उसकी स्तुति गाएँ

स्तुति की गूंज फिर से सुनाई दे,
उसके लोगों को आनंद से भर दे;
धन्यवाद की ध्वनि फिर से गूंजे—
हम उसकी स्तुति सदा-सर्वदा करते रहें।

प्रभु की स्तुति करो सदा सर्वदा
महिमा हो उसकी युगों-युगों तक


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