हे प्रभु, तेरी करुणा, तेरी प्रतिज्ञा के अनुसार तेरा उद्धार मुझे प्राप्त हो।
तब मैं अपने निन्दकों को उत्तर दे सकूंगा, मैं तेरे वचन पर भरोसा करता हूं। मेरे मुंह से सत्य का वचन कदापि मत छीन, क्योंकि मैं तेरे न्याय-सिद्धान्तों की आशा करता हूं।
मैं तेरी व्यवस्था का निरन्तर, युग-युगान्त पालन करता रहूंगा, मैं स्वतंत्रता में जीवन व्यतीत करूंगा; क्योंकि मैंने तेरे आदेशों की खोज की है।
मैं राजाओं के समक्ष तेरी सािक्षयों की चर्चा करूंगा; मैं लज्जित नहीं हूंगा। मैं तेरी आज्ञाओं से हर्षित होता हूं; उनसे मैं प्रेम करता हूं। मैं तेरी आज्ञाओं से हर्षित होता हूं; उनसे मैं प्रेम करता हूं।
मैं तेरी आज्ञाओं की ओर अपने हाथ फैलता हूं; उनसे मैं प्रेम करता हूं; मैं तेरी संविधियों का पाठ करूँगा।