भजन संहिता 51 – पाप-शुद्धि के लिए प्रार्थना

हे परमेश्‍वर, तू करुणामय है; मुझ पर कृपा कर। मेरे अपराधों को मिटा दे, क्‍योंकि तेरा अनुग्रह असीम है। मेरे अधर्म से मुझे पूर्णत: धो, मेरे पाप से मुझे शुद्ध कर।

मैं अपने अपराधों को जानता हूँ; मेरा पाप निरन्‍तर मेरे समक्ष रहता है। तेरे विरुद्ध, तेरे ही विरुद्ध मैंने पाप किया है। और वही किया जो तेरी दृष्‍टि में बुरा है। इसलिए तू अपने निर्णय में निर्दोष, और न्‍याय में निष्‍पक्ष है।

जूफा की डाली से मुझे शुद्ध कर; तब मैं पवित्र हो जाऊंगा। मुझे धो तो मैं हिम से अधिक श्वेत बनूंगा। मुझे हर्ष और आनन्‍द का सन्‍देश सुना जिससे मेरी हड्डियां जिन्‍हें तूने चूर-चूर कर दिया है, प्रफुल्‍लित हो सकें।

हे परमेश्‍वर, मुझ में शुद्ध हृदय उत्‍पन्न कर। तू मेरे भीतर नई और स्‍थिर आत्‍मा निर्मित कर। मुझे अपनी उपस्‍थिति से दूर न कर, तू अपना पवित्र आत्‍मा मुझसे वापस न ले। अपने उद्धार का हर्ष मुझे लौटा दे;

विदीर्ण आत्‍मा की बलि परमेश्‍वर को प्रिय है, हे परमेश्‍वर, तू विदीर्ण और भग्‍न हृदय की उपेक्षा नहीं करता। हे स्‍वामी, मेरे ओंठों को खोल; तब मेरा मुंह तेरी स्‍तुति करेगा। हे स्‍वामी, मेरे ओंठों को खोल; तब मेरा मुंह तेरी स्‍तुति करेगा।


सूची / song list

होम पेज / home page