भजन संहिता 95 – आओ, हम प्रभु का जय-जयकार करें

आओ, हम प्रभु का जय-जयकार करें; अपने उद्धार की चट्टान का जयघोष करें। गुणगान करते हुए हम उसके सम्‍मुख आएं; स्‍तुतिगान गाते हुए उसका जयघोष करें।

प्रभु महान परमेश्‍वर है; वह समस्‍त देवताओं के ऊपर महान राजा है;

उसके अधिकार में पृथ्‍वी के गहरे स्‍थान हैं; पर्वतों के शिखर भी उसी के हैं। जल भी उसी का है, क्‍योंकि उसने उसको बनाया है; थल की रचना उसी के हाथों ने की है।

आओ, हम उसके चरणों पर झुकें और उसकी आराधना करें; अपने निर्माता प्रभु के सम्‍मुख घुटने टेकें। वह हमारा परमेश्‍वर है, और हम उसके चरागाह की रेवड़ हैं, उसके अधिकार की भेड़ें हैं।


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