मत्ती 5 & 6 – धन्‍य-वचन और प्रार्थना

धन्‍य हैं वे, जो मन के दीन हैं; क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्‍य उन्‍हीं का है।

धन्‍य हैं वे, जो शोक करते हैं; क्‍योंकि उन्‍हें सान्‍त्‍वना मिलेगी।

धन्‍य हैं वे जो नम्र हैं; क्‍योंकि वे पृथ्‍वी के अधिकारी होंगे।

धन्‍य हैं वे, जो धार्मिकता के भूखे और प्‍यासे हैं; क्‍योंकि वे तृप्‍त किये जाएँगे।

धन्‍य हैं वे, जो दयालु हैं; क्‍योंकि उन पर दया की जाएगी।

धन्‍य हैं वे, जिनका हृदय निर्मल है; क्‍योंकि वे परमेश्‍वर के दर्शन करेंगे।

धन्‍य हैं वे, जो मेल-मिलाप कराते हैं; क्‍योंकि वे परमेश्‍वर की संतान कहलाएँगे।

धन्‍य हैं वे, जो धार्मिकता के कारण अत्‍याचार सहते हैं; क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्‍य उन्‍हीं का है।

धन्‍य हो तुम, जब लोग मेरे कारण तुम्‍हारा अपमान करते हैं, तुम पर अत्‍याचार करते और तरह-तरह के झूठे दोष लगाते हैं। खुश हो और आनन्‍द मनाओ; क्‍योंकि स्‍वर्ग में तुम्‍हें महान पुरस्‍कार प्राप्‍त होगा। तुम्‍हारे पहले के नबियों पर भी उन्‍होंने इसी तरह अत्‍याचार किया था।

हे स्‍वर्ग में विराजमान हमारे पिता! तेरा नाम पवित्र माना जाए।

तेरा राज्‍य आए। तेरी इच्‍छा जैसे स्‍वर्ग में, वैसे पृथ्‍वी पर भी पूरी हो।

हमारा प्रतिदिन का भोजन आज हमें दे।

हमारे अपराध क्षमा कर, जैसे हमने भी अपने अपराधियों को क्षमा किया है।

और हमें परीक्षा में न डाल, बल्‍कि बुराई से हमें बचा। क्‍योंकि राज्‍य, सामर्थ्य और महिमा सदा तेरे हैं। आमेन।


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