परमेश्वर का वचन

1. बाइबल की कहानियों / Bible Stories

2. बाइबिल से रचे गए गीतों की गीतमाला / Bible Songs

3. बाइबिल का सिद्धांत / Biblical Doctrine

4. बाइबल की शिक्षा / Bible Teaching


रोमियों 3:22-25 – विश्‍वास द्वारा पापमुक्‍ति

परमेश्‍वर ने चाहा कि येशु अपना रक्‍त बहा कर पाप का प्रायश्‍चित करें, जिसका फल विश्‍वास द्वारा प्राप्‍त होता है। परमेश्‍वर ने इस प्रकार अपनी धार्मिकता का प्रमाण दिया।

क्‍योंकि सब ने पाप किया और सब परमेश्‍वर की महिमा से वंचित हो गए हैं।

परमेश्‍वर के इस विधान में मुक्‍ति येशु मसीह में विश्‍वास करने से प्राप्‍त होती है और यह मुक्‍ति उन सब के लिए है, जो विश्‍वास करते हैं।

परमेश्‍वर की कृपा से सब मुफ्‍त में उस पापमुक्‍ति के द्वारा धार्मिक ठहराए जाते हैं, जो येशु मसीह में प्राप्‍त होती है।

उसने इस युग में अपनी धार्मिकता का प्रमाण देना चाहा, जिससे यह स्‍पष्‍ट हो जाये कि वह स्‍वयं धार्मिक है और उन सब को धार्मिक ठहराता है, जो येशु में विश्‍वास करते हैं।


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