व्‍यवस्‍था-विवरण 4:32-40 – प्रभु ही परमेश्‍वर है

अत: आज तू यह बात जान ले, और उसको अपने हृदय में बिठा ले कि ऊपर आकाश में और नीचे पृथ्‍वी पर प्रभु ही परमेश्‍वर है; उसके अतिरिक्‍त दूसरा ईश्‍वर नहीं है।

‘अत: बीते हुए युगों के विषय में, जो तुम्‍हारे सम्‍मुख उस दिन से व्‍यतीत हुए हैं जब परमेश्‍वर ने मनुष्‍य को पृथ्‍वी पर रचा था, यह प्रश्‍न पूछो : क्‍या आकाश के एक सीमान्‍त से दूसरे सीमान्‍त तक कभी ऐसी महान् घटना घटी है? क्‍या कभी ऐसी कोई बात सुनी गई है? क्‍या अन्‍य लोगों ने अग्‍नि के मध्‍य से जीवन्‍त परमेश्‍वर को बोलते हुए सुना है जैसा तुमने सुना, और फिर भी जीवित रहे?

जैसा तुम्‍हारे प्रभु परमेश्‍वर ने मिस्र देश में तुम्‍हारी आंखों के सम्‍मुख किया था, क्‍या वैसा किसी अन्‍य ईश्‍वर ने आकर परीक्षाओं, चिह्‍नों, आश्‍चर्यपूर्ण कर्मों, युद्ध, भुजबल, महा आतंकमय कार्यों और उद्धार के हेतु फैले हुए हाथों से किसी राष्‍ट्र को अपने लिए, दूसरे राष्‍ट्रों के मध्‍य से चुनने का साहसिक कार्य किया है?

‘ओ इस्राएली समाज! यह तुझे इसलिए दिखाया गया था कि तुझे ज्ञात हो जाए कि प्रभु ही परमेश्‍वर है; उसके अतिरिक्‍त दूसरा ईश्‍वर नहीं है।

उसने तुझे ताड़ित करने के लिए आकाश से अपनी वाणी सुनाई थी, और पृथ्‍वी पर अपनी महान् अग्‍नि दिखाई थी। तूने स्‍वयं अग्‍नि के मध्‍य से उसके वचन सुने थे।

उसने तेरे पूर्वजों से प्रेम किया था, इसलिए उसने उनके पश्‍चात् उनके वंशजों को चुना, और अपनी उपस्‍थिति से, अपने महान् सामर्थ्य से वह तुझे मिस्र देश से निकाल लाया कि तुझसे अधिक महान् और शक्‍तिशाली राष्‍ट्रों को तेरे सम्‍मुख से निकालकर उनके स्‍थान में तुझे स्‍थापित करे, पैतृक-अधिकार के लिए उनका देश तुझे प्रदान करे; जैसा आज भी है।

अत: आज तू यह बात जान ले, और उसको अपने हृदय में बिठा ले कि ऊपर आकाश में और नीचे पृथ्‍वी पर प्रभु ही परमेश्‍वर है; उसके अतिरिक्‍त दूसरा ईश्‍वर नहीं है।

इसलिए तू उसकी संविधियों और आज्ञाओं का पालन करना, जिनका आदेश आज मैं तुझे दे रहा हूं, जिससे तेरा और तेरे पश्‍चात् तेरी सन्‍तान का भला हो, और तू उस देश में दीर्घ जीवन व्‍यतीत करे, जिसको तेरा प्रभु परमेश्‍वर सदा के लिए तुझे प्रदान कर रहा है।’


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