व्‍यवस्‍था-विवरण 8,1-10 – तू अपने प्रभु परमेश्‍वर के मार्ग पर चल

तू अपने प्रभु परमेश्‍वर के मार्ग पर चल और उसके प्रति भक्‍तिभाव रख। तू उसकी आज्ञाओं का पालन करना।

‘समस्‍त आज्ञाओं के अनुसार, जिनका आदेश मैं तुझे आज दे रहा हूँ, कार्य करने के लिए तू तत्‍पर रहना, जिससे तू जीवित रहे और अधिक शक्‍तिशाली बने, और उस देश में जाकर उसको अपने अधिकार में करे, जिसको प्रदान करने की शपथ प्रभु ने तेरे पूर्वजों से खाई थी।

तू उन सब मार्गों को स्‍मरण करना, जिन पर तेरा प्रभु परमेश्‍वर तुझे चालीस वर्ष तक निर्जन प्रदेश में ले गया, जिससे वह तुझे पीड़ित करे और यह जानने के लिए तेरी परीक्षा ले, कि तेरे हृदय में क्‍या है, और कि तू उसकी आज्ञाओं का पालन करेगा अथवा नहीं।

उसने तुझे पीड़ित किया, तुझे भूख का अनुभव कराया। पर उसने तुझे “मन्ना” भी खिलाया, जिसको तू नहीं जानता था, और न तेरे पूर्वज ही जानते थे, ताकि तू जान ले कि मनुष्‍य केवल रोटी से जीवित नहीं रहता; किन्‍तु वह प्रभु के मुंह से निकले हुए प्रत्‍येक वचन से जीवित रहता है।

इन चालीस वर्षों में तेरे वस्‍त्र फटकर तेरे शरीर पर से नहीं गिरे, और न तेरे पैरों में छाले ही पड़े!

फिर भी तू अपने हृदय में यह बात जान ले कि जैसे पिता अपने पुत्र को ताड़ित करता है, वैसे ही तेरा प्रभु परमेश्‍वर तुझे ताड़ित करता है।

इसलिए तू अपने प्रभु परमेश्‍वर के मार्ग पर चल और उसके प्रति भक्‍तिभाव रख। तू उसकी आज्ञाओं का पालन करना;

क्‍योंकि तेरा प्रभु परमेश्‍वर तुझे ऐसे उत्तम देश में ला रहा है, जहाँ नदियाँ जल से सदा परिपूर्ण रहती हैं; जो झरनों का देश है, जहाँ गहरे गर्त्त के जलस्रोत घाटियों और पहाड़ियों से निकल आते हैं।

वह गेहूं, जौ, अंगूर, अंजीर, और अनारों का देश है। वह जैतून और शहद का देश है।

उस देश में तू भर पेट रोटी खाएगा। उस देश में तुझे किसी वस्‍तु का अभाव न होगा। उस देश के पहाड़ों-चट्टानों में लोहा है। तू उस देश की पहाड़ियों में से तांबा खोदकर निकाल सकता है।

तू खा-पीकर तृप्‍त रहेगा। तू उस उत्तम देश के कारण जो तेरे प्रभु परमेश्‍वर ने तुझे दिया है, प्रभु को धन्‍य-धन्‍य कहेगा।


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