भजन संहिता 116 – मैं प्रभु से प्रेम करता हूं

मैं प्रभु से प्रेम करता हूं,
क्‍योंकि उसने मेरी वाणी और
विनती सुनी है।
उसने मेरी ओर ध्‍यान दिया है,
अत: मैं अपने जीवन-भर उसको ही
पुकारूंगा।

मुझे संकट और शोक सहना पड़ा।
तब मैंने प्रभु को उसके नाम से पुकारा,
‘हे प्रभु, तू मेरे प्राण को छुड़ा।’

प्रभु कृपालु और धर्ममय है;
हमारा परमेश्‍वर दयालु है।
प्रभु भोले मनुष्‍यों की रक्षा करता है;
मैं दुर्दशा में था, उसने मुझे बचाया।

ओ मेरे प्राण, अपने नीड़ को लौट आ;
क्‍योंकि प्रभु ने मेरा उपकार किया है।
तूने मेरे प्राण को मृत्‍यु से,
मेरी आंखों को आंसुओं से,
मेरे पैरों को गिरने से बचाया।

मैं जीव-लोक में
प्रभु के समक्ष चलता हूं।
मैं तुझको स्‍तुति-बलि चढ़ाऊंगा,
और प्रभु, तेरे नाम से आराधना करूंगा।


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