भजन संहिता 33 – प्रभु ने कहा, और वह हो गया

आकाश-मण्‍डल प्रभु के वचन से
और उसकी समस्‍त स्‍वर्गिक सेना,
उसके मुंह की सांस से निर्मित हुई।
प्रभु ने समुद्र के जल को मानो पात्र में एकत्र
किया है; उसने अतल सागरों को भण्‍डार में रखा है।

समस्‍त पृथ्‍वी प्रभु से डरे;
संसार के सब निवासी उसकी भक्‍ति करें।
क्‍योंकि प्रभु ने कहा, और वह हो गया;
उसने आज्ञा दी, और वह स्‍थित हो गया।

प्रभु राष्‍ट्रों के परमार्श को विफल कर देता है;
वह जातियों के विचारों को व्‍यर्थ कर देता है।
प्रभु का परामर्श युग-युगांत स्‍थित रहता है;
उसके हृदय के विचार पीढ़ी से पीढ़ी बने
रहते हैं। धन्‍य है वह राष्‍ट्र जिसका परमेश्‍वर प्रभु है;
धन्‍य हैं वह लोग जिनको प्रभु ने अपनी मीरास
के लिए चुना है।

प्रभु स्‍वर्ग से नीचे निहारता है;
वह समस्‍त मानव-जाति को देखता है;
वह उस स्‍थान से, जहां वह सिंहासन पर
विराजमान है, धरती के समस्‍त निवासियों पर दृष्‍टिपात
करता है। वही उन सब के हृदय को गढ़ता है;
और उनके सब कार्यों का निरीक्षण करता है।
राजा का उद्धार उसकी विशाल सेना से नहीं
होता; वीर पुरुष की मुक्‍ति उसके अपार बल से
नहीं होती।

विजय-प्राप्‍ति के लिए अश्‍व-सेना दुराशा
मात्र है; वह अपनी बड़ी शक्‍ति से भी बचा नहीं
सकती। देखो, प्रभु की दृष्‍टि उन लोगों पर है
जो उससे डरते हैं;
और उन पर है जो उसकी करुणा की प्रतीक्षा करते हैं;
जिससे वह उनके प्राण को मृत्‍यु से
मुक्‍त करे; और अकाल के समय उन्‍हें जीवित रखे।


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