यहोवा चरवाहा मेरा
कोई घटी मुझे नहीं है
हरी चरईयों में मुझे
स्नेह से चराता वह है
मृतु के अन्धकार से
मैं जो जाता था
प्रभु यीशु करुणा से
तसल्ली मुझे दी है
शत्रुओं के सामने
मेज़ को बिछाता है
प्रभु ने जो तैयार की
मन मेरा मगन है
सिर पर वह तेल मला है
अभिषेक मुझे किया है
दिल मेरा भर गया है
और उमड़ भी रहा है
सर्वदा प्रभु के घर में
करूँगा निवास जो में
करुणा भलाई उसकी
आनन्दित मुझे करती है